पति चला गया, लेकिन हिम्मत नहीं टूटी… कुली बनी मां ने कंधों पर उठाया परिवार का भविष्य

सशक्त न्यूज नेटवर्क
जबलपुर: कहते हैं, मुश्किल वक्त इंसान की असली ताकत दिखाता है। मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के कुंडम गांव की रहने वाली संध्या मरावी इसकी जीती-जागती मिसाल हैं। 2016 में पति के निधन के बाद उनकी दुनिया जैसे एक पल में बदल गई। तीन छोटे बच्चों और बुजुर्ग सास की जिम्मेदारी पूरी तरह उनके कंधों पर आ गई। हालात ऐसे थे कि हार मानना आसान था, लेकिन संध्या ने संघर्ष का रास्ता चुना।

हर सुबह वह लंबी दूरी तय कर रेलवे स्टेशन पहुंचती हैं। वहां पुरुष कुलियों के बीच यात्रियों का भारी सामान उठाकर रोजी-रोटी कमाती हैं। दिनभर की कड़ी मेहनत के बाद घर लौटकर बच्चों की पढ़ाई, खाना और परिवार की बाकी जिम्मेदारियां भी निभाती हैं।

संध्या कहती हैं कि उनका सपना सिर्फ दो वक्त की रोटी जुटाना नहीं, बल्कि अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देकर आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि उन्हें कभी मजबूरी का सामना न करना पड़े। पुरुषों के वर्चस्व वाले इस पेशे में उन्होंने अपनी मेहनत और आत्मविश्वास से यह साबित कर दिया कि हौसले के आगे कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती।

आज संध्या मरावी सिर्फ अपने परिवार का सहारा नहीं हैं, बल्कि उन तमाम महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं, जो विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानतीं। उनकी कहानी बताती है कि एक मां का साहस हर मुश्किल पर भारी पड़ सकता है।

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