ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने पर हाईकोर्ट सख्त, यूपी सरकार से मांगा जवाब

सशक्त न्यूज नेटवर्क
प्रयागराज: पंचायत चुनाव टालने और कार्यकाल खत्म होने के बाद ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने साफ कहा कि कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम प्रधान प्रशासक की भूमिका नहीं निभा सकते। साथ ही सरकार से पूछा कि आखिर किन परिस्थितियों में उन्हें प्रशासक नियुक्त किया गया।

हाईकोर्ट की एकल पीठ ने राज्य सरकार को 13 जुलाई तक पंचायत चुनाव की पूरी रूपरेखा पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि संविधान के प्रावधानों के तहत पंचायतों का कार्यकाल पांच वर्ष से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता और समय पर चुनाव कराना अनिवार्य है।

सुनवाई के दौरान राज्य निर्वाचन आयोग ने अदालत को बताया कि 10 जून को मतदाता सूची प्रकाशित की जा चुकी है और आयोग चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार है। चुनाव प्रक्रिया केवल राज्य सरकार की ओर से आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी नहीं होने के कारण रुकी हुई है।

यह मामला सहारनपुर निवासी अरविंद राठौर की याचिका पर सामने आया, जिसमें कार्यकाल बढ़ाने और चुनाव टालने संबंधी सरकारी आदेशों को चुनौती दी गई है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को ओबीसी आयोग को भी पक्षकार बनाने की अनुमति दी।

उधर, कोर्ट ने पंचायतीराज विभाग के प्रमुख सचिव से हलफनामा दाखिल करने को कहा है। चेतावनी दी गई कि यदि प्रशासक नियुक्त करने के पीछे ठोस और तार्किक कारण नहीं बताए गए तो उन्हें व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना पड़ सकता है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर अवमानना की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।

राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग आंकड़े जुटा रहा है, जिसके बाद आरक्षण का अंतिम निर्धारण किया जाएगा। इसी प्रक्रिया के चलते चुनाव में देरी हुई है।

वहीं, पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि सरकार हाईकोर्ट के आदेश का अध्ययन कर विधिक राय लेगी और अदालत के निर्देशों का पालन किया जाएगा।

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