हरियाली के दावों पर कोयले की भट्ठियों का धुआं भारी, गंगा किनारे दम घोंट रही जहरीली हवा
गंगा की कटरी में धधक रहीं कोयले की भट्ठियां, ग्रामीणों की सेहत पर मंडरा रहा खतरा; चांदपुर लूक से जमाल नगर मोहद्दीनपुर तक प्रदूषण, जिम्मेदार अधिकारी मौन
रायबरेली। गंगा किनारे हरियाली बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण के दावे भले ही किए जा रहे हों, लेकिन कटरी में धधकती कोयले की भट्ठियां इन दावों की पोल खोल रही हैं। भट्ठियों से निकलता जहरीला धुआं आबादी के बीच फैल रहा है। चांदपुर लूक से लेकर जमाल नगर मोहद्दीनपुर तक कई गांवों में प्रदूषण का खतरा बढ़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि जहरीली हवा के चलते सांस संबंधी बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या पर चुप्पी साधे हुए हैं।
गंगा किनारे बसे गांवों की कटरी में कोयले की भट्ठियां लगातार धधक रही हैं। इनसे उठने वाला धुआं आसपास के वातावरण को प्रदूषित कर रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, भट्ठियों के आसपास रहने वाले लोगों को धुएं और प्रदूषण से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हवा में घुलते धुएं के बीच बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस की समस्या से जूझ रहे लोगों की मुश्किलें बढ़ने की आशंका है।
चांदपुर लूक और जमाल नगर मोहद्दीनपुर ही नहीं, गंगा किनारे बसे दूसरे गांवों में भी कोयले की भट्ठियों का संचालन होने की बात सामने आ रही है। कटरी में फैलते प्रदूषण को लेकर ग्रामीणों में चिंता है। उनका कहना है कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली इन भट्ठियों पर रोक लगाने और प्रदूषण की जांच कराने के लिए जिम्मेदार विभागों को कदम उठाने चाहिए।
जहरीले धुएं पर जिम्मेदारों की चुप्पी
गंगा किनारे पर्यावरण संरक्षण की जरूरत के बीच कोयले की भट्ठियों से निकलता धुआं बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रदूषण की समस्या के बावजूद संबंधित अधिकारी प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। अब सवाल यह है कि कटरी में धधकती इन भट्ठियों की जांच कब होगी और ग्रामीणों को जहरीले धुएं से राहत कब मिलेगी।

