सशक्त न्यूज नेटवर्क
गांधीजी से प्रभावित शिक्षक ने शादी में अपनाई सादगी, बापू और कस्तूरबा के नाम से छपवाया कार्ड; गांव में उमड़ी लोगों की भीड़
नवादा: आज के दौर में जब शादियों में महंगी गाड़ियों और भव्य सजावट को शान समझा जाता है, वहीं नवादा के एक शिक्षक ने अपनी शादी में सादगी की ऐसी मिसाल पेश की कि पूरा गांव देखने उमड़ पड़ा। माथे पर पारंपरिक पगड़ी, सफेद शेरवानी और फूलों से सजी बैलगाड़ी पर सवार होकर दुल्हन को घर लाने पहुंचे एहतेशाम रजा की अनूठी पहल इलाके में चर्चा का विषय बन गई है।
रोह प्रखंड के मरुई गांव में शुक्रवार की शाम जैसे ही एहतेशाम रजा अपनी नई नवेली दुल्हन जाकरा अकील को लेकर गांव की सीमा में दाखिल हुए, उन्हें देखने के लिए लोगों की भीड़ जुट गई। हिंदू-मुस्लिम समुदाय के महिला, पुरुष और बच्चे बैलगाड़ी के पीछे-पीछे चलते हुए दूल्हे के दरवाजे तक पहुंचे। हर कोई इस अनोखी बारात और दुल्हन की एक झलक पाने को उत्सुक दिखा।
पेशे से प्राइवेट शिक्षक एहतेशाम रजा महात्मा गांधी के विचारों से काफी प्रभावित हैं। गांधीजी के प्रति अपने प्रेम और उनके आदर्शों को दर्शाने के लिए उन्होंने शादी के कार्ड पर दूल्हा-दुल्हन के नाम की जगह ‘बापू और कस्तूरबा’ लिखवाया था। 16 अक्टूबर को नवादा शहर के मुस्लिम रोड में हुई इस शादी में भी उन्होंने सादगी को प्राथमिकता दी।
दिखावे से दूर, पुरानी परंपरा को दिया नया जीवन
एहतेशाम रजा ने बताया कि आज शादियों में बेवजह खर्च और दिखावे का चलन बढ़ रहा है। महात्मा गांधी शांति और सादगी के प्रतीक हैं। उनसे प्रेरित होकर उन्होंने दुल्हन को बैलगाड़ी से घर लाने का फैसला किया। इसका उद्देश्य फिजूलखर्ची कम करने के साथ पर्यावरण को प्रदूषण से बचाना और ग्रामीण परिवेश की पुरानी सवारी को फिर से जीवंत करना है।
बैलगाड़ी चला रहे मरुई पंचायत के मानपुर गांव निवासी हरिराम यादव भी इस मौके पर भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि वर्षों से बैलगाड़ी चलाने के बावजूद ऐसा सम्मान और गर्व पहले कभी महसूस नहीं हुआ।
दुल्हन जाकरा अकील स्नातक पास हैं और यह शादी अरेंज मैरिज है। आधुनिकता के बीच परंपरा, सादगी और गांधीवादी विचारों को अपनाने वाले इस जोड़े की पहल की ग्रामीण खूब सराहना कर रहे हैं।

