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मेहनत और लगन की बदौलत विश्व फलक पर चमक बिखेर रहीं सोनी
सशक्त न्यूज नेटवर्क
रायबरेली। समाज में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और सफलता की कहानियां आज हर किसी को प्रेरित कर रही हैं। विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं ने अपनी मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प से न केवल व्यक्तिगत सफलता हासिल की है, बल्कि समाज के लिए भी एक मिसाल कायम की है। ये महिलाएं लीक से हटकर चलने, सामाजिक बंधनों को तोड़ने और अपने सपनों को साकार करने की अदम्य इच्छाशक्ति का प्रतीक हैं।
बनारस की सोनी चौरसिया भी इन्हीं महिलाओं में हैं। सनातनी गंगा फाउंडेशन की वह ब्रांड एम्बेसडर हैं। इसके अलावा कत्थक व रोलर स्केटिंग में विश्व कीर्तिमान स्थापित किया है। गंगा परिक्रमा के दौरान नीतू डलमऊ आई। उन्होंने बेबाकी से अपने विचार सशक्त न्यूज नेटवर्क के साथ साझा किए….
1,कत्थक नृत्य में विश्व कीर्तिमान की यात्रा
आपकी कत्थक नृत्य में विश्व कीर्तिमान धारक बनने की यात्रा कैसी रही?
उत्तर – बेटी होने के नाते घर के लोग बाहर जाने से रोकते थे। मेरे नाना स्व. बच्चा लाल चौरसिया मुझे ननिहाल ले आए। वहीं मेरे शुरुआती शिक्षा मिली। संगीत के प्रति मेरा लगाव बचपन से था। 2007 में मैने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से सितार वादन में एमयूज किया। इसके बाद 2009 में प्रयागराज संगीत समिति से कत्थक में प्रवीण की उपाधि प्राप्त की। 2009 में मुझे हरियाणा के विद्या देवर जिंदल स्कूल में कत्थक शिक्षिका के पद पर मेरा चयन हो गया, लेकिन मेरा लक्ष्य कत्थक में वर्ड रिकार्ड बनाना था। 20 इस लिए सुबह तीन बजे गंगा नदी को पार कर रेती में दौड़ती और योगाभ्यास करती। वर्ड रिकार्ड के लिए नवंबर 2015 में मैने लगातार 83 घंटे नृत्य किया। इस दौरान मेरा स्वास्थ्य खराब हो गया, लेकिन यह भी एक रिकार्ड बन गया। बेहतर तैयारी के साथ चार अप्रैल 2016 को दूसरे प्रयास में लगातार 126 घंटे नृत्य करने का विश्व रिकार्ड बनाया।
2, सनातनी गंगा फाउंडेशन संस्था का लक्ष्य क्या है?
उत्तर : सनातनी गंगा फाउंडेशन सेव वाटर, सेव रीवर व पर्यावरण संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक करने का काम कर रहा है। गंगा परिक्रमा के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
3, कत्थक नृत्य की कला को जीवित रखने और उसे युवा पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए क्या प्रयास किए जाने चाहिए ?
उत्तर : मेरा लक्ष्य है कि दिव्यांग बच्चों को कत्थक में निपुण बनाना है। इसके लिए मैने नृत्य धारा अभियान शुरू किया है। इसके तहत देश के सभी राज्यों में दिव्यांग बच्चों को कत्थक कला का निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा।
4- रोलर स्केटिंग में विश्व कीर्तिमान बनाने तक आपका सफर कैसा रहा। इस क्षेत्र में भविष्य की तलाश कर रहे युवाओं को क्या संदेश देना चाहेंगी?
उत्तर – रोलर स्केटिंग पाश्चात्य सभ्यता का खेल माना जाता है। इस खेल को सनातन संस्कृति में ढालने के लिए मैने संकल्प लिया। अपने खर्चे कम कर घरवालों की चोरी से स्केटिंग खरीदा। 2010 में रोलर स्केटिंग के माध्यम से 24 घंटे नृत्य किया। यह कीर्तिमान लिम्का वर्ड रिकार्ड में दर्ज है। इस विधा में मुझे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार भी मिले हैं।
5- गंगा की अविरलता और स्वच्छता पर 10 वर्ष पहले और वर्तमान में कुछ अंतर महसूस करती हैं या नहीं।
वर्तमान को लेकर को जिज्ञासा ?
उत्तर – मेरा जन्म गंगा के किनारे हुआ है। पहले लोग गंगा में शवों को फेंक देते थे। स्नान करने के दौरान लोग सजगता से स्नान करते थे कि कहीं कोई शव उनके पैरों के नीचे न आ जाए, लेकिन स्वच्छ गंगा मिशन व नमामि गंगे के तहत कई सराहनीय प्रयास हुए, जिसका परिणाम है कि मां गंगा का जल भी स्वच्छ हुआ है और घाट भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं।