सशक्त न्यूज नेटवर्क
नई दिल्ली: यूपीआई से भुगतान करने वाले ग्राहकों के लिए दिल्ली के बाजारों में मुश्किल बढ़ सकती है। 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 15 अक्टूबर से 0.4 प्रतिशत शुल्क लगाने के एलान के बाद व्यापारियों में नाराजगी है। पूर्वी दिल्ली के शाहदरा, लक्ष्मी नगर और कृष्णा नगर समेत कई बाजारों में कुछ दुकानदारों ने यूपीआई भुगतान लेने से इनकार करना शुरू कर दिया है।
कई दुकानों पर ‘केवल नकद भुगतान’ के पोस्टर भी लगाए गए हैं।
व्यापारियों का कहना है कि छोटे और मध्यम कारोबार में पहले ही मुनाफे का मार्जिन सीमित है। ऐसे में डिजिटल पेमेंट पर अतिरिक्त लागत का सीधा असर उनके कारोबार पर पड़ेगा। खासकर किराना, कपड़े, जनरल स्टोर और अन्य खुदरा दुकानों में बड़ी संख्या में ग्राहक यूपीआई से भुगतान करते हैं।
कैश की तरफ लौटने का डर
व्यापारियों के मुताबिक यूपीआई ने लेन-देन को काफी आसान बनाया है। ग्राहक भी अब जेब में ज्यादा नकदी रखने के बजाय मोबाइल से भुगतान करना पसंद करते हैं। ऐसे में बड़े भुगतान पर शुल्क लागू होने से बाजारों में दोबारा नकद लेन-देन बढ़ने की आशंका है।
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि यूपीआई भुगतान पर किसी भी तरह का शुल्क नहीं होना चाहिए। उनका कहना है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना है तो भुगतान व्यवस्था की लागत का समाधान इंसेंटिव के जरिए किया जाना चाहिए।
सदर बाजार बारी मार्केट ट्रेड्स एसोसिएशन के अध्यक्ष परमजीत सिंह पम्मा ने कहा कि छोटे और मध्यम व्यापारियों का मार्जिन पहले से कम है। शुल्क लगने से इसका असर सीधे मुनाफे पर पड़ेगा।
ऑल बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश सिंघल ने कहा कि ग्राहकों की सुविधा के लिए दुकानों पर क्यूआर कोड लगाए गए हैं। बड़े भुगतान पर शुल्क लगा तो कारोबारियों के नकदी की ओर लौटने की आशंका है।
फेडरेशन ऑफ सदर बाजार ट्रेड्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश कुमार यादव ने कहा कि भुगतान व्यवस्था की लागत भी कारोबारी खर्च का हिस्सा है। अतिरिक्त लागत का असर आगे चलकर कीमतों पर भी पड़ सकता है।
