सशक्त न्यूज नेटवर्क
नई दिल्ली: देश में बड़े स्तर पर पहचान की जांच और डुप्लीकेट आईडी की पहचान अब और तेज हो सकती है। यूआईडीएआई से जुड़े शोधकर्ताओं ने भारत ABIS (ऑटोमेटेड बायोमैट्रिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम) तैयार किया है। यह ओपन-सोर्स मल्टी-मोडल बायोमेट्रिक सिस्टम फिंगरप्रिंट, आइरिस और चेहरे की पहचान को एक साथ इस्तेमाल करता है। शोधकर्ताओं ने इसे अरबों रिकॉर्ड वाले डेटाबेस को ध्यान में रखकर विकसित किया है।
22 करोड़ आधार रिकॉर्ड पर हुआ परीक्षण
भारत ABIS की क्षमता परखने के लिए 22 करोड़ पहचान वाले डेटाबेस पर परीक्षण किया गया। यह डेटा आधार के करीब 1.55 अरब रिकॉर्ड से रैंडम तरीके से लिया गया था और परीक्षण के लिए डेटा को डी-आइडेंटिफाई किया गया था। सिस्टम हर व्यक्ति के फिंगरप्रिंट, चेहरे और आइरिस से मिली जानकारी को मिलाकर करीब 13.5 केबी का एक संयुक्त बायोमेट्रिक टेम्पलेट तैयार करता है।
घिसे फिंगरप्रिंट से भी निपटने में मदद
सिर्फ फिंगरप्रिंट के आधार पर पहचान करने में कई बार दिक्कत आती है। उम्र बढ़ने या लगातार शारीरिक श्रम करने से उंगलियों के निशान की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। ऐसे मामलों में चेहरे और आइरिस जैसे दूसरे बायोमेट्रिक संकेत सिस्टम को सही पहचान तक पहुंचने में मदद करते हैं। शोध में मल्टी-मोडल तरीके से पहचान की सटीकता बेहतर होने की बात सामने आई है।
एक सर्वर पर 100 सर्च प्रति सेकंड
सिस्टम की स्पीड भी इसकी खासियत है। शोध के मुताबिक आठ NVIDIA H100 GPU और 2TB रैम वाले एक सर्वर पर 4 करोड़ रिकॉर्ड वाले डेटाबेस में प्रति सेकंड करीब 100 सर्च की जा सकती हैं। बड़े डेटाबेस के लिए इसमें शेड्यूलर भी बनाया गया है, जो अलग-अलग सर्वरों के बीच सर्च का काम बांटता है।
गलत पहचान की दर भी कम
शोध के अनुसार 20 मिलियन रिकॉर्ड वाले डेटाबेस में भारत ABIS ने 0.1 प्रतिशत FPIR और 0.05 प्रतिशत FNIR दर्ज किया। वहीं 22 करोड़ रिकॉर्ड वाले परीक्षण में वयस्कों के लिए 0.5 प्रतिशत FPIR पर FNIR 0.3 प्रतिशत रहा। शोधकर्ताओं ने इसकी तुलना आधार में इस्तेमाल किए जा रहे व्यावसायिक बायोमेट्रिक सिस्टम से भी की और प्रदर्शन को तुलनीय या बेहतर बताया।
ओपन-सोर्स होने से लागत घटने की उम्मीद
भारत ABIS की एक अहम खासियत इसका ओपन-सोर्स आर्किटेक्चर है। शोधकर्ताओं के मुताबिक इससे ऐसे देशों को भी बड़े पैमाने पर बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली तैयार करने का विकल्प मिल सकता है, जहां महंगे व्यावसायिक सिस्टम खरीदना मुश्किल है।

