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उत्तर प्रदेश
स्कूलों में किताब-ड्रेस पर कमीशन का खुला खेल, अभिभावकों पर हजारों रुपये का बोझ
सशक्त न्यूज नेटवर्क
लखनऊ। रायबरेली में स्कूल संचालकों पर किताब, ड्रेस और स्टेशनरी की खरीद पर कमीशनखोरी के गंभीर आरोप लगे हैं। अभिभावकों को तय दुकानों से खरीदारी के लिए मजबूर किया जा रहा है, जिससे उन पर हजारों रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। यह बेलगाम वसूली हर वर्ष जारी है।
अभिभावकों का कहना है कि स्कूल संचालक प्रवेश शुल्क के साथ-साथ स्टेशनरी पर भी भारी खर्च थोप रहे हैं। उन्हें विशेष दुकानों से ही किताबें, कॉपियां और स्कूल ड्रेस खरीदने के लिए बाध्य किया जाता है। इन दुकानों से खरीदारी करने पर अभिभावकों को बाजार मूल्य से कहीं अधिक भुगतान करना पड़ता है। यह आरोप है कि स्कूल संचालक इन तय दुकानों से भारी कमीशन लेते हैं। कमीशन के इस खेल के कारण हर साल पाठ्यक्रम की पुस्तकें बदल दी जाती हैं।
इससे पुरानी किताबें किसी काम की नहीं रहतीं और अभिभावकों को हर वर्ष नई किताबें खरीदनी पड़ती हैं। इस पूरी प्रक्रिया से अभिभावकों पर हजारों रुपये का अतिरिक्त आर्थिक दबाव बनता है। अभिभावकों ने जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) और बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) की निष्क्रियता पर सवाल उठाए हैं। शिकायतें मिलने के बावजूद इन अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है, जिससे अभिभावक बेहद परेशान हैं।
स्कूल संचालक अभिभावकों को कुछ चुनिंदा दुकानों के नाम बताते हैं। इन दुकानों पर स्कूल की किताबें, कॉपियां और यूनिफॉर्म उपलब्ध होती हैं। अभिभावकों को अन्य किसी दुकान से सामान खरीदने की अनुमति नहीं होती है। यह आरोप है कि इन दुकानों से स्कूल संचालकों को मोटा कमीशन मिलता है। इसी कमीशन के लालच में हर साल किताबों का पाठ्यक्रम बदल दिया जाता है।
अभिभावकों ने इस संबंध में कई बार जिला विद्यालय निरीक्षक और बेसिक शिक्षा अधिकारी से शिकायतें की हैं। हालांकि, इन शिकायतों पर अभी तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। अधिकारियों की इस निष्क्रियता से स्कूल संचालकों के हौसले बुलंद हैं। अभिभावक अब प्रशासन से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। उनकी मांग है कि कमीशनखोरी पर रोक लगाई जाए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो