2027 की जंग के लिए मायावती का ‘मास्टर प्लान’! 75 जिलाध्यक्षों को बुलाया, फिर चलेगा 2007 वाला सोशल इंजीनियरिंग दांव
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। सत्ता की दौड़ में अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने भी चुनावी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में उन्होंने प्रदेश के सभी 75 जिलों के जिलाध्यक्षों और पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों की अहम बैठक बुलाई है। इस बैठक में संगठन को मजबूत करने से लेकर प्रत्याशियों के चयन और चुनावी रणनीति तक पर मंथन होगा।
2007 का करिश्मा फिर दोहराने की तैयारी
बसपा की नजर एक बार फिर वर्ष 2007 के उस चुनावी फॉर्मूले पर है, जिसने मायावती को पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता के शिखर तक पहुंचाया था। उस समय पार्टी ने सोशल इंजीनियरिंग के जरिए दलितों के साथ ब्राह्मणों और अन्य वर्गों को जोड़कर शानदार चुनावी सफलता हासिल की थी। अब 2027 के चुनाव में इसी रणनीति को नए सिरे से आजमाने की तैयारी है। खासतौर पर ब्राह्मण मतदाताओं को पार्टी से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
75 जिलों के संगठन की खुलेगी रिपोर्ट कार्ड
मायावती की अध्यक्षता में पांच नवंबर को सुबह 11 बजे लखनऊ के 12 माल एवेन्यू स्थित बसपा प्रदेश कार्यालय में बैठक होगी। इसमें प्रदेश के सभी 75 जिलों के जिलाध्यक्षों के साथ संगठन के विभिन्न स्तरों के पदाधिकारी शामिल होंगे। बैठक में अब तक दिए गए निर्देशों पर हुए अमल की रिपोर्ट ली जाएगी। साथ ही बूथ स्तर तक संगठन की स्थिति, चुनावी तैयारियों और पार्टी के जनाधार को बढ़ाने के प्रयासों की समीक्षा होगी।
एक सीट से सत्ता तक पहुंचने की चुनौती
बसपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने पुराने जनाधार को वापस हासिल करने की है। वर्ष 2007 में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने वाली पार्टी 2022 के विधानसभा चुनाव में सिमटकर महज एक सीट पर रह गई थी। ऐसे में मायावती के सामने संगठन में नई जान फूंकने और विभिन्न सामाजिक वर्गों को फिर से पार्टी के साथ जोड़ने की बड़ी चुनौती है।
लखनऊ में बड़ी रैली की भी तैयारी
बैठक में अगले महीने छह दिसंबर को लखनऊ में प्रस्तावित बड़ी रैली की तैयारियों पर भी चर्चा होने की संभावना है। इसके लिए प्रदेश के विभिन्न जिलों से कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भागीदारी सुनिश्चित करने की रणनीति बनाई जा सकती है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि मायावती का 2007 वाला सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूला 2027 में कितना असर दिखाता है और क्या बसपा एक बार फिर उत्तर प्रदेश की सत्ता की मजबूत दावेदार बनकर उभर पाएगी?

