सशक्त न्यूज नेटवर्क
लंदन। कभी प्रदूषण के कारण जलीय जीवन के लिए लगभग खत्म हो चुकी लंदन की टेम्स नदी अब दोबारा जीवंत हो रही है। वर्ष 1957 में नदी के कुछ हिस्सों को वैज्ञानिकों ने ‘बायोलॉजिकली डेड’ यानी जैविक रूप से मृत घोषित कर दिया था। पानी में ऑक्सीजन की कमी और सीवेज व औद्योगिक प्रदूषण के कारण जलीय जीवों का अस्तित्व मुश्किल हो गया था। करीब सात दशक बाद नदी की तस्वीर काफी बदल गई है। अब टेम्स के ज्वारीय हिस्से और मुहाने में सील, सीहॉर्स और ईल समेत कई जलीय जीव पाए जा रहे हैं। मुहाने के निचले हिस्से में शार्क की कई प्रजातियां भी देखी गई हैं।
मुहाने में पांच प्रजातियों की शार्क
टेम्स के मुहाने में कम से कम पांच प्रजातियों की शार्क की मौजूदगी दर्ज की गई है। इनमें टोप और स्टारी स्मूथहाउंड प्रमुख हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि मुहाना छोटी शार्क के लिए नर्सरी क्षेत्र के रूप में भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
जूलॉजिकल सोसाइटी ऑफ लंदन (ZSL) के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024 में ग्रेटर टेम्स एस्टुअरी में करीब 2,987 ग्रे सील और 599 हार्बर सील दर्ज की गईं। वर्ष 2013 से ग्रे सील की संख्या में तेजी आई है। हालांकि हार्बर सील की संख्या में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। 2017 में इनकी संख्या 796 तक पहुंची थी, लेकिन इसके बाद इसमें गिरावट आई।
टेम्स की सील नदी के ऊपरी हिस्सों तक भी पहुंचती हैं। इन्हें मध्य लंदन और रिचमंड तक देखा जा चुका है।
सीवेज पर नियंत्रण से सुधरी नदी की हालत
टेम्स की बदली तस्वीर के पीछे कोई एक अभियान नहीं, बल्कि कई दशकों के प्रयास हैं। सीवेज ट्रीटमेंट में सुधार, औद्योगिक प्रदूषण पर नियंत्रण और लगातार किए गए संरक्षण कार्यों से नदी की स्थिति में सुधार आया है।
ZSL के आकलन में पानी में घुली ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ने और कॉपर व जिंक जैसे प्रदूषकों में कमी आने की बात सामने आई है। लंदन की टेम्स टाइडवे टनल से भी नदी को और राहत मिलने की उम्मीद है।
‘सुपर सीवर’ ने रोका लाखों टन सीवेज
करीब 15.5 मील लंबी टेम्स टाइडवे टनल फरवरी 2025 में पूरी तरह चालू हुई। इसका उद्देश्य पुराने विक्टोरियन सीवर तंत्र से ज्वारीय नदी में जाने वाले सीवेज को रोकना है। दावा है कि यह व्यवस्था करीब 95 प्रतिशत तक ऐसे सीवेज को रोक सकती है। जून 2026 तक टनल के जरिए 20 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक सीवेज को नदी में जाने से रोका जा चुका था।
सुधार के बावजूद चुनौतियां बरकरार
टेम्स की सेहत में सुधार के बावजूद खतरे पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। नाइट्रेट प्रदूषण अब भी चिंता का विषय है। कुछ मछलियों की आबादी में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। इसके अलावा नदी का पानी लगातार गर्म हो रहा है।
ZSL के आकलन के अनुसार, 2007 से 2024 के बीच गर्मियों में टेम्स के पानी का तापमान औसतन हर साल करीब 0.13 डिग्री सेल्सियस बढ़ा। ऐसे में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव के बीच नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को बचाए रखना अब भी बड़ी चुनौती है।
