एम्स रायबरेली का जीवनदायिनी मार्ग अतिक्रमण और अव्यवस्था की गिरफ्त में

मुंशीगंज–एम्स रोड बना ‘जोखिम कॉरिडोर’, मरीजों-एंबुलेंस का हर मिनट दांव पर

ओवरब्रिज निर्माण, अतिक्रमण और मांस-बिक्री की गंदगी, सभी मिलकर बना रहे गंभीर स्वास्थ्य संकट

एम्स, रायबरेली। शहर से सिर्फ पाँच किलोमीटर दूर देश के शीर्षतम चिकित्सा संस्थान एम्स रायबरेली तक पहुँचने वाला मार्ग आज जन-जीवन, स्वास्थ्य सुरक्षा और यातायात व्यवस्था—तीनों को संकट में डाल चुका है। मुंशीगंज बाजार से एम्स फोरलेन तिराहे तक का पूरा रास्ता अतिक्रमण, गुमटी बाजार, खुले में मांस-बिक्री, अवैध पार्किंग और रेलवे ओवरब्रिज निर्माण से उठती धूल के भयंकर गुबार की चपेट में है। यह वह मार्ग है जिसे प्रतिदिन हजारों मरीज, डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, एंबुलेंसें और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोग जीवन-रक्षक उम्मीद के साथ पार करते हैं, परंतु बदहाली ऐसी कि हर कदम पर जोखिम ही जोखिम।

ओवरब्रिज निर्माण बन रहा धूल और हादसों का केंद्र

मुंशीगंज रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण महीनों से आधे-अधूरे हाल में पड़ा है। सड़क को खोदकर छोड़ दिया गया है। उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम द्वारा निर्माण स्थल पर न बैरिकेडिंग है, न धूल नियंत्रण और न ही पानी का न्यूनतम छिड़काव। परिणाम—

मिट्टी, गिट्टी और सीमेंट सड़क पर लगातार बिखरे

वाहनों के गुजरने पर हवा में उठता इतना धूल-धुआँ कि दृश्यता चंद फीट तक सीमित

दमा, एलर्जी और सांस के मरीजों के लिए यह मार्ग किसी हेल्थ हैज़र्ड ज़ोन से कम नहीं

स्थानीय नागरिकों का कहना है— “धूल के गुबार में आँखें खुली रखना मुश्किल है, सांस लेना जोखिम है और रास्ता पार करना जान जोखिम में डालना है।”

अतिक्रमण और गुमटीयों ने मार्ग को संकरा किया, जाम स्थायी बीमारी बना

एम्स के मुख्य द्वार तक पहुँचने वाला दोनो तरफ़ का सड़क मार्ग पूरी तरह अतिक्रमण की गिरफ्त में है।

पटरियों पर कब्ज़ा

गुमटी बाजार

सड़क तक बढ़े शेड

अवैध रूप से खड़ी दुकानें और ठेले

इन सबने सड़क को इतना संकरा बना दिया है कि दो वाहन आराम से निकल भी नहीं पाते। राहगीर, मरीज, डॉक्टर—सब रोज़ाना इस स्थायी जाम के शिकार हैं।

सबसे गंभीर खतरा – मुख्य गेट के सामने खुले में मांस-बिक्री और गंदगी

मुंशीगंज शहीद स्मारक गेट के ठीक सामने लगभग 16 अवैध मांस विक्रेताओं की गुमटियाँ संचालित हैं।

खुले में काटा जा रहा मांस

बहता खून और कचरा

दुर्गंध जो अस्पताल जाने वाले मरीजों के लिए अत्यंत कष्टदायक

संक्रमण फैलने का गंभीर खतरा

स्थानीय निवासियों ने बताया कि कई बार शिकायतें की गईं, परंतु न नगरपालिका सक्रिय हुई और न कोई विभागीय कार्रवाई।

विवाह समारोह, अवैध पार्किंग से घंटों बाधित रहा मार्ग

गुरुवार/शुक्रवार की रात मुंशीगंज–एम्स मार्ग पर दो स्थानों पर आयोजित विवाह-समारोहों ने तो रास्ते को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया।

सड़क की पटरियों पर अवैध पार्किंग

पंडाल का सड़क तक फैलाव

भीड़ और डीजे जुलूस

एंबुलेंसें घंटों फँसी रहीं

एम्स के डॉक्टर व स्टाफ समय पर पहुँचना तो दूर, जाम में अटके रहे

कई मरीजों की हालत रास्ते में बिगड़ी

राहगीरों ने इसे प्रशासनिक शून्यता करार दिया, क्योंकि मौके पर एक सिपाही तक मौजूद नहीं था।

जनता और एम्स स्टाफ की जिलाधिकारी से सीधी अपील : “मार्ग को बचाइए, जानें बचेंगी”

स्थानीय नागरिकों, मरीजों के परिजनों, एंबुलेंस ड्राइवरों और एम्स स्टाफ ने जिलाधिकारी हर्षिता माथुर से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। प्रमुख माँगें—

मुंशीगंज–एम्स मार्ग को पूरी तरह अतिक्रमण-मुक्त कराया जाए।

रेलवे ओवरब्रिज निर्माण स्थल पर धूल नियंत्रण, बैरिकेडिंग और सुरक्षा मानक तत्काल लागू हों।

सड़क किनारे खुले में मांस-मुर्गा की बिक्री पर पूर्ण रोक लगे।

विवाह-समारोह, पंडाल और अवैध पार्किंग से सड़क कब्जाने वालों पर सख्त कार्रवाई हो।

लोगों का कहना है—यह मार्ग मात्र सड़क नहीं, बल्कि एम्स की लाइफलाइन है। हजारों लोगों की जानें इस रास्ते की सुगमता पर निर्भर हैं। अगर समय रहते जिलाधिकारी और प्रशासन ने स्थिति संभाली नहीं, तो कोई बड़ी दुर्घटना या गंभीर अनहोनी कभी भी हो सकती है।

मुंशीगंज–एम्स मार्ग की बदहाली अब केवल असुविधा का विषय नहीं रही, यह जन-स्वास्थ्य, जन-सुरक्षा और प्रशासनिक उत्तरदायित्व—तीनों का गंभीर प्रश्न बन चुकी है। प्रशासन कब जागेगा? यह सवाल अब हर उस मरीज, नागरिक और एंबुलेंस ड्राइवर की आँखों में है, जो रोज़ाना इस मौत जैसे जोखिम वाले रास्ते से गुजरने को मजबूर है।

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