आईआईटी कानपुर की रिपोर्ट: भूकंपरोधी नियमों की अनदेखी से कानपुर-प्रयागराज में तबाही का खतरा
सशक्त न्यूज नेटवर्क
कानपुर। आईआईटी कानपुर की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि तेजी से हो रहे निर्माण कार्यों में भूकंपरोधी नियमों की अनदेखी कानपुर और प्रयागराज में भीषण तबाही ला सकती है। सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर निहार रंजन पात्रा ने अपनी रिपोर्ट में यह चेतावनी दी है। यह रिपोर्ट पिछले 17 वर्षों से देश के विभिन्न हिस्सों में मिट्टी की जांच के आधार पर तैयार की गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, यदि निर्माण कार्यों में भूकंपरोधी नियमों का पालन नहीं किया गया, तो हिमालयन बेल्ट में आने वाला कोई भी भूकंप कानपुर और प्रयागराज जैसे शहरों में गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। प्रोफेसर पात्रा ने मिट्टी की जांच रिपोर्ट के आधार पर एक भूकंप जोखिम मानचित्र तैयार किया है। इस मानचित्र में उन क्षेत्रों को दर्शाया गया है जहां भूकंप का खतरा अधिक है।
कानपुर शहर के लगभग 43 स्थानों से मिट्टी के नमूने लेकर उनकी गहन जांच की गई है। इस जांच से पता चला है कि इन क्षेत्रों की मिट्टी की संरचना भूकंप के प्रति संवेदनशील है। रिपोर्ट में निर्माणकर्ताओं और सरकारी एजेंसियों को भूकंपरोधी मानकों का सख्ती से पालन करने की सलाह दी गई है। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि नई और पुरानी दोनों तरह की इमारतों में सुरक्षा नियमों का ध्यान रखा जाए। नियमों की जरा सी चूक बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान का कारण बन सकती है।
प्रोफेसर निहार रंजन पात्रा ने पिछले 17 वर्षों के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से मिट्टी के नमूने एकत्र किए हैं। इन नमूनों की विस्तृत जांच के आधार पर उन्होंने यह भूकंप जोखिम मानचित्र तैयार किया है। यह मानचित्र उन क्षेत्रों की पहचान करता है जहां भूकंप का खतरा अधिक है और मिट्टी की संरचना कमजोर है। इसका उद्देश्य निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने में मदद करना है। यह रिपोर्ट शहरी नियोजन और भवन निर्माण नीतियों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करती है।
आईआईटी कानपुर की टीम ने विशेष रूप से कानपुर शहर के करीब 43 स्थानों से मिट्टी के नमूने लिए। इन नमूनों की जांच से पता चला है कि शहर के कई हिस्सों की मिट्टी भूकंप के झटकों के प्रति संवेदनशील है। यह निष्कर्ष कानपुर में बन रही नई इमारतों और पुरानी संरचनाओं दोनों के लिए चिंता का विषय है। रिपोर्ट में कहा गया है कि निर्माण के दौरान भूकंपरोधी नियमों का पालन न करना भविष्य में गंभीर परिणाम दे सकता है। स्थानीय प्रशासन और बिल्डरों को इन निष्कर्षों पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।