सशक्त न्यूज नेटवर्क
पीजी छात्रों और डॉक्टरों को बांझपन के निदान से लेकर आधुनिक उपचार तकनीकों तक दी गई जानकारी, लखनऊ के विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव
रायबरेली। बांझपन की समस्या के बेहतर निदान और आधुनिक उपचार तकनीकों को लेकर एम्स रायबरेली में एक दिवसीय राष्ट्रीय शैक्षणिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की ओर से आयोजित ‘जेनोविया-ISAR नेशनल पीजी टीचिंग इनिशिएटिव’ में विशेषज्ञों ने बांझपन की समस्या से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान पीजी छात्रों और चिकित्सकों को बेसिक जांच से लेकर आधुनिक IVF और असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी की जानकारी दी गई।
‘बांझपन: बेसिक से एडवांस तक’ विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम का नेतृत्व डॉ. पारुल सिन्हा ने किया, जबकि डॉ. अपला कार्यक्रम समन्वयक रहीं। कार्यक्रम का उद्देश्य चिकित्सा विद्यार्थियों और चिकित्सकों की क्लिनिकल समझ विकसित करने के साथ बांझपन के निदान एवं उपचार में साक्ष्य आधारित चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देना रहा।
कार्यक्रम में अपर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नीरज श्रीवास्तव ने विभाग की पहल की सराहना करते हुए कहा कि बांझपन जैसे महत्वपूर्ण प्रजनन स्वास्थ्य विषय पर इस तरह के शैक्षणिक आयोजन चिकित्सा पेशेवरों को नई तकनीकों और उपचार पद्धतियों से अपडेट रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। इससे मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में भी मदद मिलती है।
वहीं, एम्स की कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर अमिता जैन ने आयोजन टीम को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वर्तमान समय में बांझपन जैसे महत्वपूर्ण विषय पर ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रमों की विशेष आवश्यकता है।
कार्यक्रम में लखनऊ की IVF विशेषज्ञ डॉ. वरदा अरोड़ा, डॉ. आंचल गर्ग और डॉ. अमृता सिंह ने अपने अनुभव साझा किए। विशेषज्ञों ने बांझपन की शुरुआती जांच, उपचार, आधुनिक प्रजनन तकनीकों और असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी।
इस दौरान एम्स के मेडिकल छात्रों, पीजी विद्यार्थियों और निजी प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। संवादात्मक सत्रों में चिकित्सकों ने सवाल-जवाब के जरिए अपनी जिज्ञासाओं का समाधान किया। कार्यक्रम का समापन चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा देने, विशेषज्ञों के बीच सहयोग मजबूत करने और बांझपन के उपचार की गुणवत्ता में सुधार के संकल्प के साथ हुआ।

