बड़ा मठ डलमऊ में स्वामी बद्री नारायण गिरी महाराज की पुण्यतिथि पर विशेष आयोजन
सशक्त न्यूज नेटवर्क
रायबरेली डलमऊ। बड़ा मठ डलमऊ में 22वें महंत पूज्य स्वामी बद्री नारायण गिरी जी महाराज की पुण्यतिथि का पावन अवसर श्रद्धापूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर प्रातः कालीन बेला में षोडशोपचार विधि से पूजन अर्चन किया गया, जिसके उपरांत विशाल भंडारे का आयोजन हुआ। इस आयोजन में दूर-दूर से पधारे संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
त्याग और सेवा की मिसाल थे पूर्व महंत
कार्यक्रम में उपस्थित महंत कृष्णानंद भारती पूज्य महाराज जी ने पूर्व महंत स्वामी बद्री नारायण गिरी जी महाराज के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में मठ परिसर में विद्यालय की स्थापना करवाई, जिससे क्षेत्र के अनेक बच्चों को शिक्षा का अवसर प्राप्त हुआ। उन्होंने बताया कि स्वामी बद्री नारायण गिरी जी गंगा जी के अनन्य भक्त थे और प्रतिदिन गंगा में स्नान कर आरती पूजन करते थे। वे गंगाजल में ही भोजन का भोग लगाते थे, जो उनकी निर्मल भक्ति का प्रतीक था।
संतों का जीवन त्याग पर आधारित
अभय शास्त्री ने कहा कि लोगों ने स्वामी बद्री नारायण गिरी जी के त्याग की भावना को सदैव याद रखा है। उन्होंने अपने जीवन से दूसरों को प्रेरित किया। अध्यक्ष स्वामी देवेंद्र गिरी महाराज महामंडलेश्वर जी ने संतों के लक्षणों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संतों का मूल मंत्र ही होता है ‘तेन तेक्तेन भुन्जीथा’, अर्थात त्याग पूर्वक जीवन जीना। मठ-मंदिरों की रक्षा का कार्य भी इसी त्याग की भावना से प्रेरित होता है।
आशीर्वाद से मिली सुख-समृद्धि
स्वामी दिव्यानंद जी ने स्वामी बद्री नारायण गिरी महाराज को एक अत्यंत सरल संत बताया। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा अनेक लोगों का कल्याण हुआ। उनके आशीर्वाद से कई लोगों को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई और आज भी उनके आशीर्वाद से लोगों को सुख-समृद्धि प्राप्त हो रही है। यह आयोजन उनकी स्मृतियों को जीवंत रखने और उनके उपदेशों को जन-जन तक पहुंचाने का एक माध्यम बना।