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ज्ञानी पुरुष की उम्र नहीं देखी जाती उसे प्रणाम करना चाहिए-राघवेंद्र महाराज

नागेश त्रिवेदी रायबरेली
जगतपुर के पूरे पंडित मजरे बैरी हार गांव में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया गया। कथा के तीसरे दिन आचार्य राघवेंद्र महाराज ने भागवत कथा के महात्म पर प्रकाश डालते हुएकहा।

श्रीमद् भागवत कथा 5000 वर्षों से चल रही है। तब से सांसारिक लोग सुन रहे हैं। और सुना रहे हैं। यह किसके लिए है। किन बातों को जानना है इस पर किसी का ध्यान नहीं है । भूत भविष्य और वर्तमान सच्चिदानंद स्वरुप है। भगवान हमेशा रहे। सांसारिक व्यक्तियों के सोचने समझने का काम इंद्रियां करती हैं। यह भी भगवान की इच्छा पर निर्भर है। वेद के अनुसार सुनाये जाने वाला संदर्भ कथा माना जाता है। सांसारिक लोकाचार का वर्णन कहानी कहा जाता है। भगवान का पहला नाम सच्चिदानंद है।

भगवान की प्रतीक्षा करो। परीक्षा काविषय नहीं है । आनंद दो प्रकार का होता है। एक साधन के द्वारा आनंद की प्राप्ति होती है। दूसरा संसार के पालन में मन रभ जाए, यानी स्वयं के द्वारा सिद्ध किया हुआ आनंद ही परमानंद की प्राप्ति करता है। मनुष्यों को तीन प्रकार की पीड़ाएं मिलती हैं। दैहिक ,दैविक भौतिक। इनसे मुक्ति पाने के लिए भगवत शरण आवश्यक है।व्यास जी सुखदेव मुनि के पिता है। भागवत कथा बताती है कि ज्ञानी पुरुष की उम्र नहीं देखी जाती। उसे प्रणाम करना चाहिए। इसीलिए व्यास जी ने सुखदेव मुनि को प्रणाम किया। भक्त प्रहलाद अश्वत्थामा द्रोपदी तथा पांडवों के चरित्र का वर्णन किया।

कहने का तात्पर्य यह है कि निश्चल भाव से ईश्वर के प्रति समर्पण तथा सांसारिक लोगों के प्रति सच्चा प्रेम ही आनंद प्राप्ति का साधन है। इस मौके पर प्रदीप कुमार त्रिवेदी, नीतू त्रिवेदी, शुभम, सुजल, गंगा लाल त्रिवेदी, बच्चन त्रिवेदी, देव शंकर मिश्रा राकेश त्रिपाठी, माता प्रसाद शुक्ला मौजूद रहे।

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