सीतापुर में बेचीं गई 6.50 लाख की कोडिनयुक्त सिरप

सशक्त न्यूज नेटवर्क
सीतापुर। सीतापुर में भी कोडिनयुक्त कफ सिरप का कारोबार चोरी छिपे धड़ल्ले से हो रहा है। फर्जी तरीके से डॉक्टर व मेडिकल स्टोर के नाम पर 6300 सिरप खपा दी गई। जब इन मेडिकल स्टोर संचालकों से बात हुई तो इन्होंने इंकार कर दिया।

मामला पकड़ में आने पर डीआई ने विक्रेता के खिलाफ शहर कोतवाली में एफआईआर दर्ज करवाई है। वहीं, मेडिकल एजेंसी के लाइसेंस निरस्तीकरण की सिफारिश की है।

डीआई अनीता कुरील ने बताया कि कोडिनयुक्त कफ सिरप के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। लखनऊ से जानकारी मिली कि इविका लाइफ लाइसेंस फार्मा से सीतापुर की श्री बालाजी फार्मा जेल रोड सीतापुर ने 6300 कोडिनयुक्त कफ सिरप अप्रैल से अक्तूबर माह 2025 के बीच खरीदी।

जब इस फार्मा के प्रोपाइटर राजेश श्रीवास्तव से विक्रय संबंधी अभिलेख तलब किए गए। इन्होंने कुछ डॉक्टरों व मेडिकल स्टोर संचालकों की बिलिंग दी। जब इन सभी से बातचीत की गई तो इन्होंने बताया कि हम लोगों ने कोई कफ सिरप की खरीद नहीं की है। यह बिल फर्जी है।

इस पर राजेश श्रीवास्तव के खिलाफ नशे का कारोबार करने के धाराओं में एफआईआर दर्ज करवाई गई है। वहीं, मेडिकल स्टोर लाइसेंस के निरस्तीकरण के लिए उच्चाधिकारियों से सिफारिश की गई है। डीआई ने बताया कि इनकी कीमत बाजार में करीब 6.50 लाख रुपये आंकी गई है।

डीआई ने बताया विक्रय अभिलेख जो सौंपे गए इनमें केवल चिकित्सक का नाम दर्ज था। इनके पते, मोबाइल नंबर व रजिस्टे्रशन नंबर नहीं थे। गहनता से जांच की गई तो पता चला कि इन सिरप को झोलाछाप के हवाले से बेच दिया गया। डीआई ने बताया कि इस सिरप को प्रतिबंधित कर दिया गया है। अधिकतर लोग इसे नशे के रूप में प्रयोग करते है।

कोडिनयुक्त कफ सिरप पकड़े जाने का जिले में यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले मिश्रिख इलाके में भी एक मेडिकल स्टोर संचालक को इस मामले में पकड़ा जा चुका है।

इस संचालक ने भी झोलाछाप को दवा बेची थी। बिलिंग फर्जी की थी। इस पर इनके खिलाफ करीब डेढ़ माह पहले नैमिषारण्य में मुकदमा पंजीकृत करवाया गया था।

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