उपेक्षा का शिकार है वह स्थान जहां श्री राम ने ली थी शिक्षा

न्यूज नेटवर्क
25 नवंबर को रामनगरी अयोध्या में जहां ध्वजारोहण के साथ भव्य आयोजन होने जा रहा है और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहुंच रहे हैं, वहीं उससे महज कुछ किलोमीटर दूर बाराबंकी के सतरिख में स्थित भगवान श्रीराम और उनके भाइयों का गुरुकुल वीरान पड़ा है।

कभी वशिष्ठ का आश्रम रहा यह तपोभूमि इस ऐतिहासिक अवसर पर भी उपेक्षा का शिकार दिखाई देती है। रविवार को जब हमारी टीम आश्रम पहुंची, तो यहां न कोई तैयारी दिखाई दी और न ही साफ-सफाई का कोई इंतजाम।

महंत नानकशरण दास खुद मानते हैं कि यह स्थिति दुखद है। आश्रम के बगल में स्थित देवघरा माता मंदिर में भी हाल और बदतर है यहां आज तक बिजली तक नहीं पहुंची

सतरिख कस्बे के निकट स्थित यह प्राचीन आश्रम वो स्थल माना जाता है जहां वशिष्ठ ऋषि ने भगवान राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न को शिक्षित किया था। यह स्थान सप्तऋषियों की साधना स्थली होने के कारण धार्मिक महत्व में अयोध्या से कम नहीं समझा जाता।

बावजूद इसके, यहां किसी भी प्रकार का धार्मिक, सांस्कृतिक या प्रतीकात्मक कार्यक्रम की व्यवस्था देखने को नहीं मिली।
रविवार को जब हमारी टीम आश्रम पहुंची तो पूरे परिसर में सूना सन्नाटा पसरा था। न कोई साज-सज्जा थी न ही किसी तैयारी का कोई संकेत। यहां बना प्राचीन शिव मंदिर भी वीरान पड़ा था।

महंत नानकशरण दास ने बताया कि पिछले वर्षों से यहां किसी प्रकार का सरकारी आयोजन या सहयोग नहीं मिल रहा। हालांकि उन्होंने बताया कि इससे पहले तत्कालीन डीएम सत्येंद्र कुमार झा ने इस आश्रम के विकास के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा है।

भगवान राम ने की थी मां की स्थापना, बिजली तक नसीब नहीं:
आश्रम के पास सटी देवघरा माता मंदिर की हालत तो और भी दयनीय मिली। स्थानीय मान्यता है कि यहां भगवान राम ने स्वयं माता की मूर्ति स्थापित की थी।

इस पवित्र स्थान पर अबतक बिजली तक नहीं पहुंची। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली विभाग और पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारियों से बार-बार गुहार लगाने के बावजूद हाल नहीं बदला।

स्थानीय लोग अपने स्तर पर परिसर में जीर्णोद्धार की कोशिशें कर रहे हैं, पर संसाधनों के अभाव में काम अधूरा है। श्रद्धालुओं का कहना है कि जब दुनिया भर में राम मंदिर और उससे जुड़े स्थलों की चर्चा है, तब भगवान के गुरुकुल को उपेक्षा में छोड़ देना विडंबना है।

गांव के बुज़ुर्गों को उम्मीद है कि अयोध्या में हो रहे ऐतिहासिक क्षण के साथ-साथ सतरिख का आश्रम भी कभी अपनी असल पहचान हासिल करेगा।

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