ओवरलोडिंग थमीं लेकिन विल्डिंग मटेरियल के दाम बढ़े
न्यूज नेटवर्क
रायबरेली जनपद में ओवरलोड वाहनों से होने वाली उगाही के सिंडिकेट का भंडाफोड़ होने के बाद अब मौरंग और गिट्टी ढोने वाले वाहन अंडरलोड चलने लगे हैं। इसका सीधा असर बिल्डिंग मटेरियल के दामों पर पड़ा है। पिछले दो सप्ताह में मौरंग, गिट्टी और कंक्रीट के दामों में तेज बढ़ोतरी दर्ज हुई है।
व्यापारियों का कहना है कि खदानों में रॉयल्टी और भाड़ा बढ़ने से कीमतें नियंत्रण में नहीं रह पा रही हैं। महंगाई बढ़ने के कारण लोग भवन निर्माण कार्य को टाल रहे हैं। ग्राहक दाम कम होने का इंतजार कर रहे हैं। इससे निर्माण सामग्री की बिक्री पर भारी असर पड़ रहा है।
बिल्डिंग मटेरियल कारोबारी शिवम मिश्रा ने बताया कि अंडरलोड चलने वाले वाहनों का किराया पहले से काफी बढ़ गया है। इसी कारण मौरंग और गिट्टी के दाम सप्ताह दर सप्ताह बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि बांदा की मोटी मौरंग अब 55 से 60 रुपये प्रति फुट बिक रही है।
पहले यही मौरंग 40 से 45 रुपये प्रति फुट के बीच मिलती थी। उन्होंने बताया कि ओती मौरंग की कीमतें भी बढ़ गई हैं। मोटी ओती 35 से 40 रुपये प्रति फुट और महीन ओती 32 से 35 रुपये प्रति फुट बिक रही है। इसी तरह कंक्रीट की कीमतों में भी बड़ा अंतर आया है।
जीरा कंक्रीट 35 रुपये प्रति फुट, आधा इंची 45 रुपये प्रति फुट, पौना इंची 50 रुपये प्रति फुट और एक इंच कंक्रीट 55 से 60 रुपये प्रति फुट में मिल रही है। मौरंग गिट्टी व्यापारी मेवा लाल यादव ने बताया कि ओवरलोड पर सख्ती के कारण ट्रकों में सीमित मात्रा में ही माल भेजा जा रहा है।
इससे परिवहन लागत बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि बाजार में दाम स्थिर नहीं हैं। प्रतिदिन में उतार चढ़ाव दिख रहा है। मौरंग और गिट्टी के दामों में लगभग 10 रुपये प्रति फुट तक का अंतर आ चुका है।
उन्होंने बताया कि जो मौरंग पहले 40 रुपये प्रति फुट में उपलब्ध थी वह अब 50 से 55 रुपये प्रति फुट में बिक रही है। लगातार बढ़ती कीमतों से न केवल निर्माण कार्य प्रभावित हुआ है बल्कि मटेरियल की मांग भी कम हो गई है। व्यापारियों ने कहा कि यदि हालात ऐसे ही रहे तो आने वाले दिनों में दाम और बढ़ सकते हैं।
फतेहपुर रोड स्थित सेमरपहा गांव के पास लगने वाली अस्थाई मौरंग मंडी अब सूनी पड़ गई है। कुछ दिन पहले तक यहां तड़के से ही ट्रकों और डंपरों की लंबी कतारें लग जाती थीं।
पूरे दिन मंडी गुलजार रहती थी। लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल गए हैं। गेगासों गंगापुल बंद होने के बाद अब एसटीएफ की कार्रवाई और प्रशासन की सख्ती के कारण यहां ट्रकों और डंपरों की आवाजाही लगभग बंद हो गई है। मंडी में अब सिर्फ एक दो डंपर ही दिखाई देते हैं। इन पर भी अंडरलोड मौरंग लदी रहती है।
पहले यहां ओवरलोड वाहनों की भरमार रहती थी, लेकिन अब सभी वाहन निर्धारित नियमों के अनुसार ही चल रहे हैं। सबसे बड़ा बदलाव नंबर प्लेट में दिख रहा है। जहां पहले वाहन नंबर कालिख से ढंके रहते थे अब वही नंबर प्लेट साफ और चमकदार दिखाई दे रही है। पीली पट्टी पर काले अक्षरों में नंबर स्पष्ट पढ़ा जा सकता है।