सशक्त न्यूज नेटवर्क
रायबरेली: दिनभर जहां दुकानदार अपने परिवार की रोजी-रोटी जुटाने में लगे थे, वहीं रात के अंधेरे में वहां जेसीबी गरजने लगी। सुबह आंख खुली तो कई दुकानों का नामोनिशान तक नहीं था। मिल एरिया थाना क्षेत्र के मलिकमऊ चौराहे पर रातोंरात दुकानें हटाए जाने का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया। दुकानदारों का आरोप है कि बिना पर्याप्त सूचना दिए जेसीबी से दुकानें ढहा दी गईं और सामान व टीन शेड भी वहां से गायब कर दिए गए।
बताया जा रहा है कि एनएचआई की जमीन पर टीन शेड डालकर लंबे समय से कई लोग दुकानें चला रहे थे। इनमें कुछ दुकानदार करीब दो दशक से कारोबार कर परिवार पाल रहे थे। अचानक हुई कार्रवाई ने उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा कर दिया है।
सीसीटीवी में कैद हुई रात की ‘कार्रवाई’
दुकानें हटाए जाने की कार्रवाई आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद होने की बात सामने आई है। फुटेज में कथित तौर पर जेसीबी से दुकानों को हटाते हुए देखा जा सकता है। इसके बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि रात के अंधेरे में यह कार्रवाई किसके निर्देश पर हुई और इसके लिए किस स्तर से अनुमति दी गई थी।
दुकानदारों का आरोप है कि पास के एक निजी अस्पताल की पार्किंग तैयार कराने के लिए उनकी दुकानें हटवाई गईं। हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
पहले से मिल रही थी चेतावनी?
मामले में पुलिसकर्मी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। दुकानदारों का कहना है कि कार्रवाई से दो-तीन दिन पहले एक सिपाही रोज वहां पहुंच रहा था और दुकानें हटाने की बात कह रहा था। कथित तौर पर दुकानदारों से अपनी दुकानें खुद हटाने को कहा गया था। इसके बाद रात में जेसीबी पहुंच गई।
दुकानदारों का सवाल है कि अगर जमीन एनएचआई की थी और दुकानें नियमों के खिलाफ थीं तो कार्रवाई की बाकायदा प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई गई? उन्हें लिखित नोटिस दिया गया था या नहीं? कार्रवाई किस अधिकारी के आदेश पर हुई? और अगर पुलिस को इसकी जानकारी थी तो रात में हुई कार्रवाई को लेकर स्थानीय पुलिस की भूमिका क्या थी?
जांच से खुलेगा राज
दुकानदारों ने पूरे मामले की जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है। सीसीटीवी फुटेज जांच का अहम आधार बन सकता है। इससे यह पता चल सकता है कि जेसीबी कब पहुंची, कौन लोग मौजूद थे और कार्रवाई के दौरान वहां कौन-कौन मौजूद था।
फिलहाल दुकानें उजड़ चुकी हैं और दुकानदार अपने नुकसान का हिसाब लगा रहे हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले को महज अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई मानता है या रात में हुई कार्रवाई की पूरी कड़ी की जांच कर जिम्मेदारी भी तय करता है।

