सशक्त न्यूज नेटवर्क
लखनऊ: राजधानी के सियासी और प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों ठेकों से लेकर तबादलों तक की चर्चाएं खूब हैं। कहीं एक छोटी फर्म के देखते ही देखते करोड़ों के कारोबार तक पहुंचने की कहानी चर्चा में है तो कहीं तबादलों की सूची ने एक प्रभावशाली नेता की नाराजगी बढ़ा दी। अमर उजाला की ‘सुना है क्या’ रिपोर्ट में ऐसे ही कई मामलों का जिक्र किया गया है।
10-15 लाख की फर्म से सवा सौ करोड़ तक पहुंचने की चर्चा
रिपोर्ट के मुताबिक, लखनऊ से सटे एक जिले में नगर निगम के ठेकों को लेकर चर्चाएं हैं। दावा है कि एक ठेकेदार की करीब 10-15 लाख रुपये की फर्म कुछ ही वर्षों में सवा सौ करोड़ रुपये से ज्यादा के कारोबार तक पहुंच गई। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि कई बड़े टेंडर एक ही ठेकेदार को मिले। मामले में दो अधिकारियों पर कार्रवाई की बात भी सामने आई है।
रिपोर्ट में ठेकेदार को कथित राजनीतिक सरपरस्ती मिलने और लग्जरी कार से जुड़े दावे भी किए गए हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
तबादला सूची ने बिगाड़ा नेताजी का मूड
शिक्षा से जुड़े एक विभाग में बीच सत्र हुए तबादले भी सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बने हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, लंबे समय से महत्वपूर्ण जगहों पर जमे कुछ प्रभावशाली लोगों का भी तबादला कर दिया गया। बताया गया है कि एक नेता ने पहले तबादला सूची को फर्जी बताते हुए विभाग से इसका खंडन करने की मांग की थी। बाद में सूची सही पाए जाने पर उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए नाराजगी जताई।
सरकारी गाड़ियों का मामला भी कम दिलचस्प नहीं
खेल विभाग में सरकारी वाहनों को लेकर भी सवाल उठने की बात रिपोर्ट में कही गई है। बताया गया है कि विभाग के पास इस्तेमाल लायक सरकारी वाहनों की संख्या सीमित है। नई गाड़ी उपलब्ध कराने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, लेकिन इसके बाद शासन की ओर से मांगी गई जानकारी को लेकर अधिकारी पीछे हटते नजर आए। अब यह मामला भी विभागीय गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
