सशक्त न्यूज नेटवर्क
लखनऊ: यूपी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सपा और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे पर खींचतान तेज होती दिख रही है। कांग्रेस जहां बड़ी संख्या में सीटों पर दावेदारी कर रही है, वहीं समाजवादी पार्टी सीटों की संख्या सीमित रखने के संकेत दे रही है।
हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, सपा कांग्रेस को करीब 45 से 50 सीटों से ज्यादा देने के पक्ष में नहीं है और टिकट बंटवारे में जीत की संभावना को सबसे बड़ा आधार बनाने की तैयारी में है।
हालांकि, सीटों की संख्या को लेकर अलग-अलग स्तर पर अलग दावे सामने आ रहे हैं। इससे पहले सपा की ओर से कांग्रेस को 75-80 सीटों तक दिए जाने की संभावना की बात सामने आई थी। वहीं कांग्रेस 2017 के गठबंधन फॉर्मूले का हवाला देते हुए 100 से ज्यादा सीटों की मांग कर रही है।
सपा का फोकस सीट नहीं, जिताऊ प्रत्याशी पर
सपा का जोर सीटों की संख्या बढ़ाने के बजाय उन सीटों पर है, जहां गठबंधन का प्रत्याशी चुनावी मुकाबले में मजबूत स्थिति में हो। पार्टी की रणनीति में संभावित प्रत्याशियों की सूची और स्थानीय जातीय समीकरणों को अहम माना जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार सपा अपनी जीती हुई 111 सीटों पर खुद चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है।
कांग्रेस 100 से ज्यादा सीटों पर अड़ी
दूसरी तरफ कांग्रेस 2017 के विधानसभा चुनाव में मिले सीट बंटवारे को आधार बनाकर बड़ी हिस्सेदारी चाहती है। कांग्रेस की ओर से 105 से लेकर 120 सीटों तक की मांग की खबरें सामने आई हैं। पार्टी का तर्क है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में उसके प्रदर्शन और संगठन विस्तार को सीट बंटवारे में जगह मिलनी चाहिए।
प्रत्याशी पहले तय करने पर जोर
सीटों के साथ प्रत्याशियों के चयन को लेकर भी दोनों दलों के बीच पेंच है। सपा चाहती है कि संभावित उम्मीदवारों के नाम पहले सामने आएं, ताकि स्थानीय समीकरणों के हिसाब से टिकट पर फैसला किया जा सके। कांग्रेस भी चुनाव को लेकर संगठनात्मक तैयारियों में जुटी है और कई सीटों पर संभावित उम्मीदवारों को लेकर काम कर रही है।
फिलहाल असली पेच सीटों की संख्या और उन पर प्रत्याशी चयन को लेकर है। शीर्ष नेतृत्व की बातचीत के बाद ही गठबंधन का अंतिम फॉर्मूला साफ होने की उम्मीद है।
