लाइब्रेरी में अलग से संग्रहीत होगा जनपद का साहित्य: अतुल भार्गव
न्यूज नेटवर्क
रायबरेली। आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति न्यास की ओर से प्रकाशित ‘आचार्य पथ’ स्मारिका-पत्रिका के प्रधान संपादक आनंद स्वरूप श्रीवास्तव को आज फिरोज गांधी कॉलेज में अंगवस्त्र एवं बुके देकर भावभीनी विदाई दी गई।
13 वर्षों से संपादन कर रहे 79 वर्षीय श्री श्रीवास्तव स्वास्थ्य कारणों से संपादन कार्य से स्वैच्छिक निवृत्त हुए हैं। सभी ने स्मारिका के संपादन में उनके योगदान की सराहना करते हुए उनके दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना की।
कॉलेज के प्रबंधन मंत्री इं. अतुल भार्गव ने कहा कि आनंद स्वरूप ने अपने संपादन कौशल से साहित्य में एक नई परंपरा की नींव डाली है। उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। आनंद स्वरूप श्रीवास्तव के आग्रह पर उन्होंने कॉलेज की लाइब्रेरी में जनपद के साहित्यकारों का अलग कैटलॉग और अलग अलमारी बनाई जाएगी।
प्रो. उदयभान सिंह ने कहा कि आचार्य पथ के संपादन के साथ उन्होंने साहित्य को स्थापित किया है। वर्तमान में वह जनपद की महत्वपूर्ण विरासत हैं। न्यास के सचिव गौरव अवस्थी ने कहा कि आर्यन स्वरूप श्रीवास्तव ने आचार्य द्विवेदी की परंपरा का निर्वहन करते हुए आचार्य पथ स्मारिका को पत्रिका का कलेवर प्रदान किया।
साहित्य की सभी विधाओं को वह साथ लेकर चले। आचार्य द्विवेदी की परंपरा को निभाते हुए ही संपादन ग्रहण करने के पूर्व वह दो अंको की सामग्री भी सुरक्षित करके दे गए हैं। आचार्य द्विवेदी समिति के अध्यक्ष विनोद शुक्ला एवं संपादन मंडल के सदस्य राजीव भार्गव ने उनके स्वस्थ एवं दीर्घ जीवन की कामना की।
न्यास की ओर से विनोद शुक्ला, श्रीमती क्षमता मिश्रा, श्रीमती भावना यादव, श्रीमती प्रिया पांडेय, श्रीमती बीना शुक्ला, शिवम मिश्रा सेनानी, शंकर प्रसाद मिश्र ने बुके एवं अंगवस्त्र देकर श्री श्रीवास्तव को सम्मानित किया। फिरोज गांधी कॉलेज की ओर से प्रबंधन मंत्री अतुल भार्गव, उपाध्यक्ष राजीव भार्गव एवं प्राचार्य प्रो. मनोज त्रिपाठी ने बुके एवं अंगवस्त्र प्रदान किया। सभी उपस्थित लोगों में आचार्य पथ स्मारिका का नवीन अंक भी वितरित किया गया।
इस मौके पर डॉ लक्ष्मीकांत त्रिपाठी, डॉ अरविंद श्रीवास्तव, डॉ किरण श्रीवास्तव, डॉ संजय सिंह, डॉ आजेंद्र प्रताप सिंह आदि मौजूद रहे।
विदाई समारोह में भावुक हुए कवि एवं लेखक आनंद स्वरूप श्रीवास्तव ने कहा कि स्वास्थ्य कारणों से वह संपादन कार्य से जरूर अलग हो रहे हैं लेकिन न्यास के आदेश पर वह हमेशा तत्पर रहेंगे।
उन्होंने कॉलेज प्रबंध तंत्र से अन्य जनपदों की तरह कॉलेज परिसर में आचार्य द्विवेदी शोध पीठ की स्थापना का आग्रह किया। उन्होंने आचार्य पद के तमाम अंक एवं अपनी प्रकाशित पुस्तक के भी कॉलेज पुस्तकालय को भेंट की।
न्यास के सचिव गौरव अवस्थी ने भी अपने संपादन में प्रकाशित हुई तीन पुस्तकें- आकाश में कोरोना घना है, कोरोना कितना अथाह-कितना अपार एवं संस्मरणों पर आधारित पुस्तक उत्तरोत्तर पुस्तकालय को भेंट में दीं।