नगर मजिस्ट्रेट का इस्तीफा: UGC नियमों पर उठाए सवाल, शिक्षा व्यवस्था पर कॉर्पोरेट हावी होने का आरोप
सशक्त न्यूज नेटवर्क
बरेली। सवर्ण समाज और ब्राह्मण समाज के कथित अपमान से आहत होकर बरेली के नगर मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस अप्रत्याशित निर्णय ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है और यह चर्चा का विषय बन गया है।
UGC नियमों पर उठाए गंभीर सवाल
अलंकार अग्निहोत्री द्वारा लिखे गए विस्तृत त्यागपत्र में उन्होंने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा प्रस्तावित और लागू किए जा रहे UGC Regulations 2026 पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका मानना है कि ये नियम भारतीय शिक्षा व्यवस्था की पारंपरिक गुरुकुल प्रणाली, सनातन संस्कृति और सामाजिक संतुलन के विरुद्ध हैं। उन्होंने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से कहा है कि इन नियमों के माध्यम से शिक्षा को धीरे-धीरे एक कॉर्पोरेट मॉडल में बदला जा रहा है।
ज्ञान की जगह बाजार को प्राथमिकता
नगर मजिस्ट्रेट ने अपने त्यागपत्र में इस बात पर जोर दिया कि नए नियमों के तहत शिक्षा में ज्ञान, संस्कार और सेवा जैसे मूल्यों की जगह केवल बाजार और प्रबंधन आधारित सोच को प्राथमिकता दी जा रही है। उनका मानना है कि यह भारतीय शिक्षा के मूल सिद्धांतों के साथ खिलवाड़ है और यह देश की सांस्कृतिक और सामाजिक जड़ों को कमजोर करेगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा का व्यवसायीकरण छात्रों के सर्वांगीण विकास में बाधक बनेगा।
प्रशासनिक हलकों में चर्चा
अलंकार अग्निहोत्री का यह कदम न केवल व्यक्तिगत विरोध का प्रतीक है, बल्कि यह शिक्षा नीति पर एक व्यापक बहस को भी जन्म दे सकता है। उनके इस्तीफे के बाद प्रशासनिक और शैक्षिक क्षेत्रों में इस मुद्दे पर गहन विचार-विमर्श शुरू हो गया है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और UGC इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या इन नियमों पर पुनर्विचार किया जाएगा।