धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र में रायबरेली के महेंद्र अग्रवाल का भव्य सम्मान
डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र गीता-भावना और निष्काम कर्म के प्रखर व्याख्याकार
न्यूज नेटवर्क
रायबरेली। अंतरराष्ट्रीय श्रीमद्भगवद्गीता जयंती समारोह–2025 के अंतर्गत मातृभूमि सेवा मिशन द्वारा आयोजित ‘गीता सेवा संवाद’ में मिशन के संस्थापक, अध्यात्म-चिंतक एवं गीता–तत्वज्ञान के प्रखर प्रचारक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने निष्काम कर्म, निःस्वार्थ सेवा एवं कर्तव्य-धर्म के सनातन सिद्धांतों पर विशेष उद्बोधन देते हुए कहा कि मनुष्य के जीवन का प्रत्येक क्षण कर्म से जुड़ा है, और जब कर्म फल-आकांक्षा से मुक्त होकर ईश्वरार्पित भाव से किए जाते हैं, तभी वे साधना का रूप ग्रहण करते हैं।
गीता का मूल संदेश मानव को भीतर से उदात्त बनाता है और उसे कर्मयोग की ओर अग्रसर करता है। कार्यक्रम में जिले के प्रमुख समाजसेवी, मानव सेवा संस्थान के अध्यक्ष एवं मातृभूमि सेवा मिशन इकाई रायबरेली के मुख्य संरक्षक महेंद्र कुमार अग्रवाल का विशेष सम्मान किया गया।
बताते चलें कि महेंद्र अग्रवाल हाल ही में अवध क्षेत्र से हरियाणा के धर्मक्षेत्र–कुरुक्षेत्र पहुंचे थे, जहाँ मातृभूमि सेवा मिशन मुख्यालय इकाई ने अत्यंत श्रद्धा, गौरव और पारंपरिक सम्मान-विधि के साथ उनका भव्य अभिनंदन किया। उन्हें अंगवस्त्र एवं पुष्पमालाओं से अलंकृत किया गया तथा गौशाला परिसर में गौ-माता के दिव्य दर्शन एवं गौ-सेवा का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
कुरुक्षेत्र धाम की आध्यात्मिक चेतना, गीता-भूमि का तेज और डॉ. मिश्र से प्राप्त अध्यात्म-ज्ञान ने अग्रवाल को गहराई से अभिभूत किया। रायबरेली लौटकर पत्रकारों से बातचीत में महेंद्र अग्रवाल ने भावुक स्वर में कहा कि“गीता की पवित्र भूमि पर खड़ा होते ही ऐसा लगा जैसे आत्मा को दशकों से प्रतीक्षित आलोक मिल गया हो।
डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र का मार्गदर्शन और कुरुक्षेत्र की आध्यात्मिक ऊर्जा मेरे जीवन को नई दिशा देने वाली है। ऐसे युग-पुरुषों का सान्निध्य मिलना सौभाग्य है।” उन्होंने डॉ. मिश्र की राष्ट्रहित, समाजसेवा और आध्यात्मिक जागरण की अनवरत तपस्या की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।
कार्यक्रम में पंच कैलाशी रामप्रकाश श्रीवास्तव, राकेश जैन, नवीन चंद सहित कई विशिष्ट वक्ताओं ने भी गीता-धर्म पर सारगर्भित विचार व्यक्त किए। मातृभूमि शिक्षा मंदिर के बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम ने पूरे वातावरण को भक्तिमय और आध्यात्मिक रंगों से सराबोर कर दिया। समापन में अतिथियों को मिशन द्वारा स्मृति-चिह्न एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।