दो दशक तक दर्द से लिपटी शबा ने ज़िंदगी को सेवा का साया बना दिया

इंसानियत का चिराग बुझा… रायबरेली ने खो दी एक रौशन दिल, ख़िदमत की अज़ीम मिसाल सबा शकील

20 वर्षों की मुफ्त पाठशाला ने सैकड़ों बच्चों की तक़दीर रोशन की

दिव्यांग समाजसेवी सबा शकील के इंतकाल पर शहर में रंज–ओ–ग़म

सामाजिक संगठनों व गणमान्यों ने कहा “सबा एक शख़्स नहीं, एक रोशनी थीं”

रायबरेली। रायबरेली में बीते शुक्रवार का दिन एक गहरे सदमे और सन्नाटे के साथ ढल गया। दिव्यांग समाजसेवी सबा शकील के इंतकाल की ख़बर ने पूरे शहर को शोक में डुबो दिया। मस्कुलर डिस्ट्रॉफी जैसी असाध्य बीमारी से लगभग बीस वर्ष तक जूझते हुए भी, सबा ने न कभी अपना हौसला छोड़ा, न ही इंसानियत की ख़िदमत का अपना फ़र्ज़।

बिस्तर तक सीमित रहने के बावजूद, उन्होंने अपने घर को मुफ़्त पाठशाला में बदल दिया—एक ऐसी पाठशाला जिसने सैकड़ों गरीब और जरूरतमंद बच्चों की ज़िंदगी बदली, उनमें उम्मीद, शिक्षा और हिम्मत की लौ जलाई।बीते दो दिनों से उनकी तबीयत बेहद नाज़ुक थी।

शुक्रवार दोपहर करीब 1 बजे उन्होंने अपने आवास पर आख़िरी सांस ली। इसके कुछ ही दिन पहले, बाल दिवस पर वह अपने बच्चों के साथ मुस्कुराहटों से भरा जश्न मना रही थीं—उसी अटूट जज़्बे के साथ, जिसे बीमारी भी झुका न सकी।

सबा ने अपने पीछे जो विरासत छोड़ी है, वह किसी सरकारी सम्मान या प्रशस्ति की मोहताज नहीं।उनकी नेकी, उनकी रहमत और उनकी हिम्मत ही उनका असल परिचय हैं। सबा की पाठशाला से निकला हर बच्चा आज इस बात की गवाही देता है कि वह सिर्फ़ एक दिव्यांग महिला नहीं थीं—

वह उम्मीदों की रौशनी थीं, सब्र का सबक थीं, इंसानियत की तारीख़ थीं।उनके इंतकाल की ख़बर फैलते ही शहर में ग़म की लहर दौड़ गई। सामाजिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े अनेक जिम्मेदार लोगों ने उनके जाने को अपूरणीय क्षति बताया।

आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति न्यास के संयोजक गौरव अवस्थी, आचार्य द्विवेदी समिति के अध्यक्ष विनोद कुमार शुक्ला, कोषाध्यक्ष विनय द्विवेदी, नगर पालिका अध्यक्ष सत्रोहन सोनकर, पूर्व अध्यक्ष मोहम्मद इलियास, कर्मचारी नेता करुणा शंकर मिश्रा, बैंक कर्मचारी नेता विनोद शुक्ला, समाजसेवी अमर द्विवेदी, प्राथमिक शिक्षक संघ नेता सुधीर द्विवेदी, कांग्रेस प्रवक्ता महताब आलम, तथा अधिवक्ता एवं पत्रकार शकील अहमद समेत अनेक गणमान्यों ने गहरा दुख प्रकट किया।

सभी ने एक स्वर में कहा—
“सबा शकील एक नाम नहीं, इंसानियत की वो रौशनी थीं जो अपने बाद भी दिलों में जलती रहेंगी।”

रायबरेली ने आज एक ऐसी बेटी को खो दिया,
जिसने तकलीफ़ों को अपनी मजबूरी नहीं बनने दिया,
बल्कि इंसानियत की सबसे खूबसूरत मिसाल बनकर
अपना जीवन लोगों के नाम कर दिया। बीपी सिंह ने कहा ईश्वर उनकी रूह को सुकून दे…

More From Author

You May Also Like