डलमऊ में पाटी पूजन की परंपरा का निर्वहन: वसंत पंचमी पर विद्या आरंभ संस्कार

सशक्त न्यूज नेटवर्क
रायबरेली। वसंत पंचमी के पावन अवसर पर विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा का विशेष विधान है। इस दिन पीले वस्त्र धारण करना और पीला भोजन करना अत्यंत शुभ माना जाता है। शुक्रवार को सनातन धर्मपीठ बड़ा मठ परिसर में महामंडलेश्वर स्वामी देवेंद्रानंद गिरि ने विधि-विधान से मां सरस्वती की आराधना की। इस शुभ अवसर पर, कस्बे के कृष्णापुरम निवासी शैलेश मिश्र अपनी दोनों बेटियों, अक्षिता और अक्षदा के साथ आश्रम पहुंचे। उन्होंने अपनी बालिकाओं का पाटी पूजन, जिसे विद्यारंभ संस्कार भी कहा जाता है, संपन्न कराया।

सनातन धर्मपीठ के महामंडलेश्वर ने बताया कि आश्रम में बसंत पंचमी के अवसर पर अन्य महत्वपूर्ण संस्कार भी संपन्न हुए। इस वर्ष तीन बटुकों का यज्ञोपवीत संस्कार भी आश्रम में आयोजित किया गया। महामंडलेश्वर ने इस बात पर जोर दिया कि वसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की विधिवत पूजा-अर्चना करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है। यह दिन ज्ञान की देवी को समर्पित है और इस दिन किए गए अनुष्ठान विशेष फलदायी माने जाते हैं।

पाटी पूजन, जिसे विद्यारंभ संस्कार के नाम से भी जाना जाता है, बच्चों की शिक्षा की शुरुआत का एक पारंपरिक अनुष्ठान है। यह संस्कार बच्चों को ज्ञान के मार्ग पर अग्रसर करने की एक पवित्र परंपरा है। इस दिन बच्चे पहली बार अक्षर ज्ञान प्राप्त करते हैं, जिससे उनके बौद्धिक विकास का शुभारंभ होता है। डलमऊ के सनातन धर्मपीठ में ऐसे संस्कारों का आयोजन भक्तों को धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़े रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह आयोजन न केवल बच्चों के भविष्य के लिए एक शुभ संकेत है, बल्कि यह प्राचीन वैदिक परंपराओं को जीवित रखने का भी एक प्रयास है। इस प्रकार, वसंत पंचमी के दिन डलमऊ के सनातन धर्मपीठ में पाटी पूजन की परंपरा का निर्वहन हुआ, जो विद्या और ज्ञान की देवी मां सरस्वती के प्रति गहरी आस्था को दर्शाता है।

More From Author

You May Also Like