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कड़ाके की ठंड में भी उत्साह से जुटे प्रशिक्षार्थी, विवेकानंद की कर्मठता का जीवंत उदाहरण

सशक्त न्यूज नेटवर्क
रायबरेली। कौशल विकास संस्थान, रायबरेली में महान चिंतक, युगप्रवर्तक एवं युवाओं के शाश्वत प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद जी की जयंती राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर योग कार्यक्रम के रूप में अत्यंत अनुशासित, ऊर्जावान और गरिमामय वातावरण में मनाई गई। यह आयोजन गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गेल) के सामाजिक निगमित दायित्व (सीएसआर) के अंतर्गत संचालित कौशल विकास संस्थान, रायबरेली तथा मातृभूमि सेवा मिशन, धर्म क्षेत्र कुरुक्षेत्र (इकाई—रायबरेली) के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ स्वामी विवेकानंद जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया।

इस अवसर पर वक्ताओं ने स्वामी विवेकानंद जी के जीवन, विचार और दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे केवल संन्यास और आध्यात्म के प्रतीक नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और मानवसेवा से परिपूर्ण भारतीय युवाशक्ति के अमर आदर्श हैं। उनका स्पष्ट संदेश था कि सशक्त शरीर और स्थिर मन के बिना किसी भी महान लक्ष्य की प्राप्ति संभव नहीं—और योग इसी संतुलन का श्रेष्ठ साधन है।

मातृभूमि सेवा मिशन से पधारे संयोजक प्रदीप पांडेय ने अपने उद्बोधन में कहा कि स्वामी विवेकानंद विश्व की युवा शक्ति की ऊर्जा के प्रतीक हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे विवेकानंद जी के चरित्र से आत्मगौरव, साहस, अनुशासन और सेवा भाव को आत्मसात कर राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका सुनिश्चित करें। मातृभूमि सेवा मिशन इकाई मंडल अध्यक्ष भगवत प्रताप सिंह ने कहा कि योग तन और मन दोनों को परिष्कृत कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

स्वामी विवेकानंद जी के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार उन्होंने भारत को आध्यात्मिक चेतना के बल पर विश्वपटल पर स्थापित किया, उसी प्रकार आज का युवा योग, संयम और सतत परिश्रम से स्वयं को श्रेष्ठ नागरिक बना सकता है।

संस्थान के प्रधानाचार्य योगेंद्र कुमार मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि योग मानवीय चेतना को सर्वोच्च स्तर तक ले जाने का सशक्त माध्यम है। यह न केवल शारीरिक स्वास्थ्य, बल्कि मानसिक स्थिरता और नैतिक शक्ति का भी आधार है। स्वामी विवेकानंद जी के जीवन से प्रेरणा लेते हुए उन्होंने कहा कि आत्मसंयम, कर्मनिष्ठा और राष्ट्र के प्रति समर्पण ही सच्चे योग की पहचान है, और यही गुण युवाओं को जीवन में ऊंचाइयों तक ले जाते हैं। योग सत्र का संचालन प्रशिक्षक अनूप शर्मा एवं वेदांत मिश्रा द्वारा किया गया। वार्म-अप अभ्यास से प्रारंभ करते हुए सूर्य नमस्कार, ताड़ासन, वृक्षासन, भुजंगासन, कपालभाति, भ्रामरी, अनुलोम-विलोम तथा ओम् मंत्र के सामूहिक उच्चारण के साथ योगाभ्यास कराया गया।

कड़ाके की ठंड के बावजूद संस्थान के प्रशिक्षार्थियों ने पूर्ण उत्साह और अनुशासन के साथ सहभाग किया, जो स्वामी विवेकानंद जी की कर्मठता और आत्मबल की प्रेरणा का सजीव उदाहरण रहा। कार्यक्रम में संस्थान के प्रधानाचार्य योगेंद्र मिश्रा, प्रशिक्षक शशि नंदन तिवारी, अंकित पांडेय, कमलेश द्विवेदी, ओम प्रकाश साहनी, अनिल कश्यप, रोली परिहार, शालिनी यादव, रश्मि मिश्रा एवं प्रीति तिवारी सहित अन्य स्टाफ सदस्यों ने सक्रिय सहभाग किया।

कार्यक्रम की रूपरेखा संस्थान के कार्यकारी निदेशक अजेश मणि त्रिपाठी द्वारा निर्धारित की गई। आयोजन की संपूर्ण तैयारी ओम प्रकाश साहनी, कमलेश द्विवेदी एवं प्रीति तिवारी ने प्रशिक्षार्थियों के सहयोग से सफलतापूर्वक संपन्न कराई। आयोजन को दिशा और मार्गदर्शन संस्थान के सचिव संजय वर्मा द्वारा प्रदान किया गया।

इस अवसर पर अतिथियों एवं प्रशिक्षकों ने युवाओं को स्वामी विवेकानंद जी के अमर संदेश—“उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक रुको मत”—पर चलने का आह्वान किया तथा योग को दैनिक जीवनशैली का अभिन्न अंग बनाने की प्रेरणा दी। उल्लेखनीय है कि कौशल विकास संस्थान, रायबरेली पाँच प्रमुख संकायों के माध्यम से युवाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें रोजगार से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयासरत है। संस्थान में इंडस्ट्रियल इलेक्ट्रिशियन, इंडस्ट्रियल वेल्डर, कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव, प्रोसेस इंस्ट्रूमेंटेशन टेक्नीशियन एवं पाइप फिटर जैसे प्रमुख जॉब रोल्स में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

यहां से प्रशिक्षित युवा देश की विभिन्न प्रतिष्ठित कंपनियों में सेवाएं देकर न केवल अपने परिवारों को आर्थिक संबल प्रदान कर रहे हैं, बल्कि स्वामी विवेकानंद जी के सशक्त, आत्मनिर्भर और जागरूक भारत के स्वप्न को साकार करने में भी सक्रिय सहभाग निभा रहे हैं।

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